मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
प्रेरक लघुकथा जिसमें मित्रता को परखने का आग्रह किया गया है. वर्तमान परिवेश में बच्चों-किशोरों को मित्रों की परख होना ज़रूरी. विद्यालयों में बिगड़ते माहौल पर तंज़ कसती हुई लघुकथा जहाँ विद्यार्थियों का पक्ष सुनने की बजाय उन पर पूर्वाग्रहयुक्त फ़ैसले थोपने पर मंथन करने को कहती है.
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती सार्थक प्रतिक्रिया हेतु.
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बहुत सुंदर और प्रेरक लघुकथा 👌👌
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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लाजवाब लघुकथा 👌👌👌
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13.02.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3610 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी ।
ReplyDeleteधन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर स्थान देने हेतु.
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सटीक एवं सार्थक सृजन....
ReplyDeleteसही कहा स्कूलों में टीचर आजकल बच्चों की बात पूरा नहीं सुनते और कक्षा में कई बार एक दो बच्चों की शरारत पर पूरे ही छात्रों को सजा दे देते हैं ऐसे में अच्छे बच्चे बहुत आहत हो जाते हैं और कभी कभी अपनी अच्छाई ही खो बैठते हैं....
छात्रों और शिक्षकों दोनो के लिए चिन्तनपरक संदेश देता सृजन....
बहुत लाजवाब।
सादर आभार आदरणीय सुधा दीदी मनोबल बढ़ाती सुंदर सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु.स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे.
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बहुत सार्थक लघु कथा ।
ReplyDeleteऐसी ही घटनाओं से होनहार बच्चे अवसाद में घिर जाते हैं और अपना नुकसान कर बैठते हैं कभी कभी तो पुरा भविष्य दांव पर लग जाता है ।
अध्यापकों का रवैया कई बार घातक सिद्ध होता है।
चिंतन परक कथा ।
सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती सारगर्भित समीक्षा हेतु. स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे.
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बहुत सारगर्भित और उद्देश्यपूर्ण लघु कथा प्रिय अनीता | बाल मनोविज्ञान का सुंदर वर्णन , कथा का सशक्त पक्ष है |
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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बहुत सारगर्भित लघुकथा,अनिता दी।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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चिंतन परक लघु कथा अनीता ,सादर स्नेह
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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सच जरुरी है परख अपने मित्रों की , नहीं तो लेने के देने पड़ते हैं और बाद में पछताना पड़ता है
ReplyDeleteबहुत अच्छी प्रस्तुति
सादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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वाह!प्रिय सखी ,बहुत ही शिक्षाप्रद रचना 👌
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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नमस्ते,
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में शुक्रवार 14 फरवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
सादर आभार आदरणीय सर पाँच लिंकों पर स्थान देने हेतु.
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बहुत सुंदर और संदेशपरक लघुकथा
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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लाजवाब और शिक्षाप्रद लघुकथा 👌👌
ReplyDeleteसुन्दर सृजन के लिए बधाई अनीता जी ।
सादर आभार आदरणीय मीना दीदी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
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इस लघुकथा ने एक पुरानी याद ताजा कर दी। उसे कहानी रुप में लिखने का मन है। जब अपने बच्चे के साथ अन्याय होता दिखे तब माँ की घुटन का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। उस पर माँ शिक्षिका हुई तो आदर्श और ममता के टकराव में खुद भी घायल होती है और बच्चे को भी घायल कर देती है।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय मीना दीदी मनोबल बढ़ाती सुंदर सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु.स्नेह आशीर्वाद बनाए रखे.
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