मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
१७२० में प्लेग ,१८२० में कॉलेरा, १९२० में स्वाइन फ्लू ,२०२० में कोरोना का प्रकोप।
ReplyDeleteहाँ ,अनीता जी ,आपने तो गौर करने योग्य बात कही हैं ,वैसे तो यकीनन इसे जानते सब हैं मगर आज आपका लेख पढ़कर इस बात पर ध्यान गया।
प्रकृति हर सौ साल पर मानव को उनकी हदे याद दिलाने आ ही जाती हैं ,फिर भी हमें अक्ल नहीं आती।
बेहद मार्मिक कहानी ,एक लाचारी मगर डयूटी तो डयूटी हैं ,सादर स्नेह आपको
सादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
Deleteसादर स्नेह
सादर नमस्कार ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (24 -3-2020 ) को " तब तुम लापरवाह नहीं थे " (चर्चा अंक -3650) पर भी होगी,
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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कामिनी सिन्हा
सादर आभार आदरणीया दीदी चर्चामंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
Deleteसादर
व्यवस्था को गतिमान रखने के लिये समय की परीक्षा में खरे उतरने वाले ही श्रद्धा और सहानुभूति के पात्र बनते हैं। जीवन की सामान्य-सी बात को संदेशात्मक, अर्थपूर्ण और रोचक बनाती प्रशंसनीय लघुकथा।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteसादर प्रणाम
बहुत सुन्दर।
ReplyDeleteघर मे ही रहिए, स्वस्थ रहें।
कोरोना से बचें।
भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
सादर आभार आदरणीय सर
Deleteसादर प्रणाम
सुन्दर प्रस्तुति
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteसादर प्रणाम