मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
जी नमस्ते,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (04 मई 2020) को 'गरमी में जीना हुआ मुहाल' (चर्चा अंक 3705) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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रवीन्द्र सिंह यादव
संशोधन-
Deleteआमंत्रण की सूचना में पिछले सोमवार की तारीख़ उल्लेखित है। कृपया ध्यान रहे यह सूचना आज यानी 18 मई 2020 के लिए है।
असुविधा के लिए खेद है।
-रवीन्द्र सिंह यादव
सादर आभार आदरणीय चर्चामंच पर स्थान देने हेतु.
Deleteस्त्री मन की चिन्ता को मर्मस्पर्शी भावों में शब्द चित्र सा उकेर दिया है...घर में अकेली रहती गाँव की न जाने कितनी ही फुलिया महामारी के संकटकाल में घुल रहीं हैं चिन्ता में...बहुत सुन्दर लघुकथा ।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीया मीना दीदी लघुकथा की सार्थक समीक्षा करती सुंदर प्रतिक्रिया के लिए.
Deleteसादर.
मर्मस्पर्शी रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रया हेतु.
Deleteसुन्दर रचना अनीता जी |
ReplyDeleteशुक्रिया आपका का
Deleteभावप्रवण और मार्मिक प्रस्तुति।
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया सर
Deleteबेहद हृदयस्पर्शी प्रस्तुति
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
बहुत ही भावुक प्रस्तुति।
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय उत्साहवर्धन करती समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
ग्रामीण परिवेश में पनपते जज़्बात को क़रीने से पिरोती मर्मस्पर्शी लघुकथा। अनपढ़ व्यक्तियों को भी जीवन जीने का सलीक़ा ख़ूब आता है,वे अबोध नहीं होते बल्कि परिस्थितियों का मुक़ाबला करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं और छद्म स्वार्थों,छलकपट आदि से स्वयं को बचाते हुए त्यागी जीवन का वरन करते हैं।फुलिया की मासूमियत उसके प्रति पाठक के मन में सहानुभूति उत्पन्न करने में सक्षम है। लघुकथा को अनावश्यक विस्तार से बचाना ज़रूरी है।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर सुंदर सारगर्भित मनोबल बढ़ाती समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
फुलिया जैसी न जाने कितनी औरतेंं आज इस महामारी में इसी तरह बेवस परेशान किसी अपने के इंतजार में आँखें गड़ाए बैठी हैं दिल को छू लेने वाली बहुत ही सुन्दर लघुकथा....।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीया सुधा दीदी लघुकथा का मर्म स्पष्ट करती सुंदर प्रतिक्रिया के लिए.
Deleteसादर.
काश, बृजमोहन लौट आए. पूरी कहानी पढ़ते हुए बार बार मन यही कहता रहा. बहुत अच्छी कहानी.
ReplyDeleteसही कहा आदरणीया दीदी काश सकुशल लौट आए सभी के बृजमोहन.सादर आभार मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
DeleteAdbhut
ReplyDeleteKheti Kare
सादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ती प्रतिक्रिया हेतु.
Deleteसादर
ये मन है न मन ,इस मन को तो समझती ही है आप ,ये जरा जरा सी बात पर विचलित हो जाता है ,कही का गुस्सा कही निकाल देता है ,फुलिया का मन भी राह तकते हुए दुखी हो गया ,कहानी बहुत ही बढ़िया है बहना ,मेरी बहना लिखती ही बहुत अच्छा है ।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी मनोबल बढ़ाती सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteसुन्दर
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया हेतु.
Deleteसादर
घर घर यही कहानी रही कोरोनाकाल में, अच्छा चित्रण किया है आपने।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय मीना दीदी मनोबल बढ़ाती सुंदर प्रतिक्रिया हेतु.
Deleteसादर
SSC News thanks for sharing this information
ReplyDeletePls go through Local Update
ReplyDeleteand forward suggestions.
Dragon Fruit Farming
ReplyDeleteअरबी की खेती
ReplyDeleteस्ट्राबेरी की खेती
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