मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
'पिता मानव की सज़ा तय की गयी' लघुकथा में प्रकृति के विभिन्न अंगों के बीच मानव की अपरिमित लालसा जब नियति के बंधनों का उपहास उड़ाते हुए हाहाकार मचाती भौतिकता के वशीभूत हो जाय तो प्रकृति का कोप किसी न किसी रूप में फूट पड़ता है। कोरोना वायरस से फैली महामारी ने इंसानी जीवन को गंभीर ख़तरों में डाल दिया है। अनीता सैनी जी ने अपनी लघुकथा में विश्व समाज को संदेश संप्रेषित करने हेतु प्रासंगिक कथानक ख़ूबसूरती से गढ़ा है। समकालीन परिवेश पर एक विस्तारित लघुकथा के माध्यम से मानव जाति की भयावह दुर्गति का मूलाधार चित्रित किया है जिसमें पशु-पक्षी,पेड़,पानी और मानव जो प्रकृति के अभिन्न अंग हैं, इनका अंतरसंबंध विश्लेषित करते हुए मानव की महत्त्वाकांक्षा की व्याकुल हूक को उसकी दुर्दशा का उत्तरदायी होना और उसे पिता जैसा सम्मान मिलना जैसी कथावस्तु को बड़ी ख़ूबसूरती से सँजोया गया है। मानव चूँकि प्रकृति की अनमोल कृति है जिसके पास बुद्धि-विवेक का अकूत ख़ज़ाना है तो उस पर परिवार के मुखिया / पिता जैसा दायित्त्व स्वतः ही उसके ऊपर आ जाता है। हालाँकि कहानी में मानव को पिता संबोधित करना असाधारण कल्पना। मासूम पशु-पक्षी, पेड़-पौधे अपने मूल्य बरक़रार रखते हुए मनुष्य को चेतावनी देते हुए माफ़ करते हैं और उसे मात्र सांकेतिक सज़ा का एलान किया जाता है।
ReplyDeleteलघुकथा में शिल्पगत विशेषताएँ वातावरण, संवाद, कथावस्तु एवं उद्देश्य आदि प्रभावशाली ढंग से उभरे हैं। संवादों का आधिक्य, साधारण शब्दावली, अनावश्यक विस्तार, मुहावरों- लोकोक्तियों का अभाव आदि इस लघुकथा के नकारात्मक बिंदु हो सकते हैं हालाँकि मानक हिंदी शब्दों व व्याकरणिक अंगों का प्रभावशाली प्रयोग इसकी विशेषता बनकर उभरे हैं।
सादर आभार आदरणीय सर लघुकथा की बारीकी से समीक्षा करने हेतु. मार्गदर्शन करते रहे.
Deleteसादर
जी नमस्ते,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (03-04-2020) को "नेह का आह्वान फिर-फिर!" (चर्चा अंक 3660) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
सादर आभार आदरणीय दीदी चर्चामंच मर मेरी लघुकथा को स्थान देने हेतु.
Deleteसादर
सुंदर ,मनोरजंक लघु कथा अनीता जी ,मानव को सजा तो मिलेगी ही और मिल भी रही हैं।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
बहुत सुन्दर लघु कथा।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
Deleteसादर