मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
मार्मिक कथा
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteआपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर चर्चा - 3680 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
ReplyDeleteधन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क
सादर आभार आदरणीय सर चर्चामंच पर मेरी लघुकथा को स्थान देने हेतु.
Deleteबहुत मार्मिक रचना प्रिय अनिता | कथित संभ्रांत वर्ग अपनी भव्यता के नीचे इतना अधम मुखौटा भी लगाये रहता है ये सोचना बहुत मुश्किल है | पर वो भूल जाता है ये दिन आने जाने हैं | हिसाब सभी चुकाने हैं |
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सुन्दर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
दिल को छू देने वाली रचना। नौकरी में अक्सर ऐसा होता है।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteअच्छी कहानी !
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteइस लघुकथा को पढ़कर एक टीस मन में उभरती कि आदर्श और व्यवहारिक रूप में व्यक्ति कितना अलग-अलग होता है। स्त्री करुणा की जीती-जागती मूर्ति नज़र आती है वहीं पुरुष बड़े सरकारी औहदे पर होते हुए भी जीवन की वास्तविकताओं के साथ अपने स्वार्थ को ही ऊपर रखता है।
ReplyDeleteघरेलू स्त्रियों का भावुक या अति भावुक होना उनका सामाजिक वातावरण से रोज़ाना का सीमित परिचय होता है वहीं कामकाजी पुरुष दिनभर में अनेक परिस्थितियों को जीता है और सामना करता है।
गोपाल और उसके बेटे जैसे किरदार हमारे आसपास ख़ूब मिलते हैं।लघुकथा एक बड़े संदेश के साथ समाज का चेहरा चित्रित करने में सक्षम है।
सादर आभार आदरणीय सर सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteआशीर्वाद बनाये रखे.
सादर प्रणाम
समाज के धनाढ्य वर्ग के स्वार्थपरता और बेरूखी भरे व्यवहार पर प्रकाश डालती मार्मिक कथा .बहुत सुन्दर और संदेशपरक सृजन.
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteसादर स्नेह
भावमय करती रचना
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
Deleteस्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर प्रणाम
सब तरह से लायक होते हुए भी गरीब अपनी गरीबी से नहीं उबर पाता इसका एक बड़ा कारण ये भी है...धनाढ्य वर्ग अपने खिदमतगार को उसकी स्थिति से उबारना नहीं चाहता...चाहे वह कितना भी सक्षम हो....
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर हृदयस्पर्शी लघुकथा।
सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
Deleteसादर