मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
प्रिय अनु तुम्हारी लिखी यह लघुकथा हम तीसरी बार पढ़ रहे हैं। शब्द नहीं सूझ रहे क्या प्रतिक्रिया लिखें इस पर मन भावुक हो जा रहा हर बार। एक सैनिक के मन की व्यथा उसके मनोभावों का सजीव चित्रण किया है तुमने।
ReplyDeleteमन से वीर सपूतों को और उनके ज़ज़्बे को
प्रणाम करते हैं। इन सैनिकों के परिवार के सदस्य भी उतनी ही श्रद्धा के पात्र है क्योंकि सामूहिक त्याग ही कर्तव्य पथ पर दृढ होकर चलने को प्रेरित करती है।
इतने सारगर्भित सार्थक हृदयस्पर्शी लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करो मेरी।
सादर आभार प्रिय श्वेता दीदी शब्द नहीं हैं मेरे पास कि कैसे आपका आभार व्यक्त करूँ. लघुकथा पर आपकी सराहना पाकर मन बहुत ख़ुश हुआ. यह लघुकथा सैनिक जीवन की वास्तविक घटना पर आधारित है. दर्द को छिपाना और प्यार बाँटना सैनिक जीवन का अलंकरण हैं. मेरी यह लघुकथा सैनिकों को समर्पित है.
Deleteआपके स्नेह और समर्थन की सदैव आकाँक्षी हूँ.
अनीता मैं ईश्वर का बहुत आभारी हूँ की आप मुझे जीवन साथी के रूप मे मिले | आप ही ने मुझे हिमत दी हौसला दिया, आप का त्याग तो मुझसे भी बड़ा है |
ReplyDeleteलघुकथा पर आपकी मर्मस्पर्शी टिप्पणी पाकर मन बहुत प्रफुल्लित हुआ. आपकी दी हुई जीवनोपयोगी सीख सदैव मुझे धैर्यवान बनाते हुए साहस से भरती है.
Deleteनमस्ते,
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में रविवार 12 अप्रैल 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सर पाँच लिंकों पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए.
Deleteसादर
मार्मिक आलेख।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteबेहद मर्मस्पर्शी सृजन 👌👌
ReplyDeleteसादर आभार बहना
Delete"नहीं और देखना भी नहीं चाहता क्योंकि मैं देश का सिपाही हूँ और वे मेरे लोग। वे कितना ही ग़ुरूर पालें परंतु तुम्हारे जितने बहादुर नहीं हैं वे, नहीं कर सकते परिवार का त्याग।"
ReplyDeleteसच ,हर एक की बस की बात नहीं हैं ये त्याग ये समर्पण का भाव विरले को ही मिलती हैं ,हृदयस्पर्शी दास्तान अनीता जी ,हर एक सैनिक की मनोदशा का सुंदर चित्रण,सादर स्नेह
सादर आभार आदरणीय दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
Deleteसादर
बहुत सुन्दर
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर
Deleteहृदय स्पर्शी कथा ।
ReplyDeleteसैनिकों के मनोभावों को बहुत सुंदरता से उकेरा है प्रिय अनिता आपने।
सचमुच सैनिक की धुरी बस देश रक्षा पर घुमती रहती है।
और सभी गौण हो जाते हैं।
शानदार सृजन।
सादर आभार आदरणीया दीदी आपकी समीक्षा हमेशा हृदय को संबल प्रदान करती है. आपका स्नेह आशीर्वाद बना रहे.
Deleteसादर
जी नमस्ते,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (13-04-2020) को 'नभ डेरा कोजागर का' (चर्चा अंक 3670) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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रवीन्द्र सिंह यादव
सादर आभार आदरणीय सर चर्चा मंच पर मेरी रचना को स्थान देने हेतु.
Deleteसादर
बहुत ही लाजवाब लघुकथा अनीता जी।
ReplyDeleteसैनिकों के कर्म के साथ उनका परिचय और परिचय के साथ ही मनोभाव....।तीनों कमांडोज का साथ रहते हुए भी पदस्थ अन्तर...वाह!!!!
सैनिक के मनोभावों को आप से बेहतर कौन समझ सकता है।
बहुत ही हृदयस्पर्शी लाजवाब लघुकथा।
सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
Deleteस्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
सादर
निःशब्द कर दिया आपने ... बहुत ही उम्दा सृजन आपका 👌👌
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीया दीदी उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
Deleteस्नेह आशीर्वाद बना रहे.