मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका 'लघुकथा डॉट कॉम' में मेरी लघुकथा 'सीक्रेट फ़ाइल' प्रकाशित हुई है। पत्रिका के संपादक-मंड...
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 30 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर संध्या दैनिक में मेरी लघुकथा को स्थान देने हेतु.
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सादर नमस्कार,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (01-05-2020) को "तरस रहा है मन फूलों की नई गंध पाने को " (चर्चा अंक-3688) पर भी होगी। आप भी
सादर आमंत्रित है ।
"मीना भारद्वाज"
सादर आभार आदरणीया मीना दीदी चर्चामंच पर मेरी लघुकथा को स्थान देने हेतु.
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बहुत सुन्दर और भावप्रवण रचना।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु.
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कहने को हम आधुनिक समाज के प्रतिनिधि हैं किंतु पुरातन संस्कार हमारी ज़रा-सी चमड़ी खुरचकर देखे जा सकते हैं। लड़का-लड़की में भेदभाव करते समाज के दकियानूसी विचार पर आज भी लेबर रूम के बाहर देखे-सुने जा सकते हैं। समाज की बड़ी सड़ी-गली सोच को बख़ूबी प्रस्तुत करती उद्देश्यपूर्ण लघुकथा।लघुकथा में कथानक की स्पष्टता और संवादों में स्थानीय मुहावरों के प्रयोग की रोचकता ध्यानाकर्षक है।
ReplyDeleteसादर आभार आदरणीय सर सारगर्भित सकारात्मक समीक्षा हेतु. आशीर्वाद बनाये रखे.
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बेटा बेटी का ये भेदभाव जाने कब खत्म होगा समाज से....जाने कितनी परीक्षाओं में खरा उतरना होगा बेटी को...बहुत सुन्दर लघुकथा...
ReplyDeleteआँचलिक भाषा से कथानक और भी जीवन्त और सटीक बन पड़ा है।
सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर सकारात्मक समीक्षा हेतु. स्नेह आशीर्वाद बनाये रखे.
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